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बिलासपुर, 12 अगस्त। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। बुधवार को एम्स बिलासपुर के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिमाचल लौटने वाले सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नियुक्त करने के बजाय नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की कमी एक बड़ी चुनौती है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य मेडिकल कॉलेजों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ पर्याप्त और योग्य फैकल्टी उपलब्ध करवाना है।मुख्यमंत्री के अनुसार, हिमाचल के जो डॉक्टर सुपर स्पेशलाइजेशन करने के बाद प्रदेश में वापस लौटना चाहते हैं, उनके लिए वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्ति की व्यवस्था की जाएगी। ऐसे डॉक्टरों को बेहतर वेतन और सुविधाएं उपलब्ध करवाकर प्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं मिलने से उन्हें प्रदेश के अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार का विशेष फोकस विशेषज्ञ एवं सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को दूर करने पर है।मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पहले मेडिकल कॉलेजों में पीजी कक्षाएं शुरू करने और इसके बाद एसआरशिप की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके बाद मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए नियुक्तियां की जाएंगी।स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक पर जोरएम्स बिलासपुर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान के विभिन्न विभागों का दौरा किया और फैकल्टी सदस्यों, अधिकारियों तथा विशेषज्ञों से स्वास्थ्य सेवाओं एवं मेडिकल तकनीक को लेकर चर्चा की। उन्होंने अस्पताल के कुछ वार्डों में जाकर मरीजों का कुशलक्षेम भी जाना और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल में आधुनिक मेडिकल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को मजबूत करना है, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अपने राज्य में ही उपलब्ध हो सकें।उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रदेश के करीब पांच मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों में तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेजों में भी नई तकनीक उपलब्ध करवाने की दिशा में काम किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने के बाद प्रदेश में हेल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
