संधोल, 13 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले मेलों और उत्सवों में स्थानीय कलाकारों को अधिक से अधिक अवसर देने की मांग उठने लगी है। समाजसेवी एवं कलाकार भोलू संधोलिया ने कहा कि हिमाचल के मेलों की पहचान यहां की संस्कृति, लोक संगीत और स्थानीय कलाकारों से है, इसलिए मेला समितियों को स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता देनी चाहिए।भोलू संधोलिया ने कहा कि प्रदेश में वर्षभर अनेक धार्मिक, सांस्कृतिक और जिला स्तरीय मेले आयोजित होते हैं। इन मेलों में स्टार नाइट और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। बड़े कलाकारों को मंच देना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ ही हिमाचल के स्थानीय और उभरते कलाकारों के लिए भी पर्याप्त मंच और बेहतर समय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि हिमाचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांव-गांव में ऐसे कलाकार मौजूद हैं, जो पहाड़ी लोकगीत, नाटी, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत को आगे बढ़ा रहे हैं। इनमें कई कलाकार आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं।भोलू संधोलिया ने कहा कि स्टार नाइट में बाहरी कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों को भी प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। स्थानीय कलाकारों को केवल कार्यक्रम की शुरुआत में कुछ मिनटों का समय देने के बजाय उन्हें मुख्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, ताकि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और पहचान बनाने का उचित अवसर मिल सके।उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों को मेलों में लगातार काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और नई पीढ़ी भी कला के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित होगी। साथ ही हिमाचल की लोक संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी होगा।भोलू संधोलिया ने सरकार, जिला प्रशासन और मेला समितियों से आग्रह किया कि आगामी मेलों के लिए कलाकारों का चयन करते समय स्थानीय कलाकारों के लिए विशेष अवसर सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाहर के कलाकारों को बुलाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अपने प्रदेश के कलाकारों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा, “हिमाचल के मेलों में हिमाचली कलाकारों की आवाज सबसे मजबूत होनी चाहिए। हमारी संस्कृति और हमारी कला को मंच मिलेगा, तभी स्थानीय कलाकारों का भविष्य सुरक्षित होगा।
