नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026। मालदीव और भारत के बीच थिलाफुशी पोर्ट को लेकर हुए सहयोग के बीच अब बड़ा बदलाव सामने आया है। मालदीव पोर्ट्स लिमिटेड (MPL) ने चीन की China Harbour Engineering Company (CHEC) के साथ समझौता किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, थिलाफुशी पोर्ट के पहले चरण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य CHEC को दिए गए हैं।गौरतलब है कि नवंबर 2024 में भारत और मालदीव ने थिलाफुशी द्वीप पर आधुनिक कमर्शियल पोर्ट विकसित करने में सहयोग की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य माले बंदरगाह पर बढ़ते दबाव और भीड़ को कम करना तथा माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना था।अब मालदीव ने थिलाफुशी में पोर्ट विकास के लिए CHEC के साथ कदम बढ़ाया है। जुलाई 2026 में MPL और CHEC के बीच हुए समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय और घरेलू जहाजों के लिए महत्वपूर्ण की-वॉल निर्माण का काम शामिल है। परियोजना में 14.6 मीटर गहरी और 375 मीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय की-वॉल तथा 5 मीटर गहरी और 820 मीटर लंबी घरेलू की-वॉल का निर्माण शामिल है।इस घटनाक्रम ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। चीन की CHEC पहले भी हिंद महासागर क्षेत्र सहित विभिन्न बड़े बुनियादी ढांचा और बंदरगाह परियोजनाओं में काम कर चुकी है। ऐसे में थिलाफुशी जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर चीनी कंपनी की भूमिका बढ़ने को भारत के दक्षिणी पड़ोस में चीन के बढ़ते प्रभाव के नजरिए से देखा जा रहा है।मालदीव सरकार की आधिकारिक परियोजना जानकारी के अनुसार, माले के कमर्शियल पोर्ट को थिलाफुशी स्थानांतरित करने की योजना पर काम जारी है और सरकार ने नवंबर 2027 तक प्रमुख परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। नए पोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह, घरेलू/अटोल सेवा, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित की जानी हैं।भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि थिलाफुशी Greater Malé Connectivity Project (GMCP) से जुड़ा हुआ है और भारत मालदीव में इस क्षेत्र समेत कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। अब थिलाफुशी पोर्ट में चीनी कंपनी की बढ़ती भूमिका से भारत-मालदीव संबंधों और हिंद महासागर में बदलते रणनीतिक समीकरण पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
