शिमला, 1 अगस्त 2026।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही लगातार सामने आ रही भूस्खलन, सड़क धंसने, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं पर आपकी आवाज़ न्यूज़ के चेयरमैन प्रदीप शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अभी मानसून की शुरुआत ही हुई है, लेकिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग हर दिन प्राकृतिक आपदा की खबरें सामने आ रही हैं। यह स्थिति भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्रदीप शर्मा ने कहा कि हिमाचल एक संवेदनशील पहाड़ी राज्य है, जहां हर वर्ष बारिश के मौसम में प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है। यदि मानसून के शुरुआती चरण में ही हालात इतने चिंताजनक हैं, तो आने वाले सप्ताहों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के लिए केवल मौसम को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। अवैज्ञानिक निर्माण, पहाड़ों का अनियंत्रित कटान, पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी और जल निकासी व्यवस्था की कमियां भी कई स्थानों पर नुकसान को बढ़ाती हैं। विकास आवश्यक है, लेकिन वह प्रकृति के संतुलन के साथ होना चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से आग्रह किया कि राहत और मुआवजे के साथ-साथ दीर्घकालिक उपायों पर भी गंभीरता से काम किया जाए। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, ढलानों का स्थायी संरक्षण, मजबूत जल निकासी व्यवस्था, समय पर चेतावनी प्रणाली और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रदीप शर्मा ने आम लोगों से भी अपील की कि वे प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें, खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना सरकार और जनता—दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समय रहते दूरदर्शी और वैज्ञानिक कदम उठाए गए, तो प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हिमाचल के सुरक्षित भविष्य के लिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
