आपकी आवाज न्यूज़ हमीरपुर ,14 अगस्त 2026। हिमाचल प्रदेश की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध खान-पान परंपरा से भी है। सेपू वड़ी, बबरू, पटांडे, नासस्थ, अकतौरी, महणी और तुडकिया भात जैसे कई पारंपरिक हिमाचली व्यंजन आधुनिक खान-पान के बढ़ते प्रभाव के कारण धीरे-धीरे लोगों की थाली से दूर होते जा रहे हैं।IHM कॉलेज हमीरपुर के शेफ परनीश पठानिया ने कहा कि हिमाचल के इन भूले-बिसरे पारंपरिक व्यंजनों को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। इन व्यंजनों में स्थानीय अनाज, दालों, जड़ी-बूटियों और मौसमी सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जो हिमाचली खान-पान को अपनी अलग पहचान देता है।शेफ परनीश पठानिया के अनुसार, पारंपरिक व्यंजनों का दस्तावेजीकरण करने के साथ युवाओं को पाक-कला प्रशिक्षण के माध्यम से इन्हें तैयार करने की विधियां सिखाई जानी चाहिए। इसके अलावा प्रदेश के होटल और रेस्तरां के मेन्यू में पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों को प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पर्यटक भी हिमाचल के पारंपरिक स्वाद से परिचित हो सकें।उन्होंने कहा कि हिमाचली व्यंजनों का संरक्षण केवल पारंपरिक स्वाद को बचाना नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और सदियों पुरानी पाक-कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।शेफ परनीश पठानिया ने कहा कि यदि समय रहते इन व्यंजनों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में प्रयास किए जाएं, तो हिमाचल की पारंपरिक पाक विरासत को पर्यटन और होटल उद्योग के माध्यम से नई पहचान दिलाई जा सकती है।