कुल्लू, 22 जुलाई। प्रदेश में मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवर्म के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने जिला कुल्लू में निगरानी और नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। किसानों को समय रहते कीट की पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।उप कृषि निदेशक डॉ. ऋतु गुप्ता ने बताया कि विभाग द्वारा गठित जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक टीम प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रही है। इसी क्रम में टीम ने खोखन पंचायत के मक्की के खेतों का दौरा किया, जहां फसल में फॉल आर्मीवर्म का लगभग 5 से 10 प्रतिशत प्रकोप पाया गया।निरीक्षण दल में जिला कृषि अधिकारी सुशील कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा के कीट वैज्ञानिक डॉ. रमेश लाल, कृषि विकास अधिकारी राकेश कुमार तथा कृषि विकास अधिकारी भुंतर मधुसूदन शर्मा शामिल रहे।डॉ. ऋतु गुप्ता ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म की शुरुआती पहचान मक्की की पत्तियों पर सुई जैसे छोटे-छोटे छेद तथा बाद में बनने वाले बड़े अनियमित सुराखों से होती है। इसकी सूंडियां पत्तियों की मध्यकली के भीतर रहकर तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाती हैं।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें। यदि प्रकोप अधिक हो तो एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए विभाग ने 5 लीटर अग्निअस्त्र या ब्रह्मास्त्र को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि मक्की की पत्तियों पर छेद, मध्यकली में कीट या कीट का मल दिखाई दे तो तुरंत कृषि विभाग या निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते नियंत्रण कर फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

