अनुसूचित जाति आयोग ने लॉन्च किया ‘भीम पत्र’, अधिकारों के प्रति जागरूकता पर दिया जोर
शिमला, 28 जुलाई। हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने शिमला जिले के चियोग स्कूल में दलित छात्रा के हाथों से बना भोजन न खाने के कथित भेदभाव मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।यह निर्णय मंगलवार को शिमला स्थित बचत भवन में आयोजित राज्य अनुसूचित जाति आयोग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया तथा अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक को संबोधित करते हुए आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं आयोग की “आंख और कान” हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के साथ कहीं भी अन्याय, अत्याचार या भेदभाव होता है तो उसकी सूचना कुछ ही समय में आयोग तक पहुंच जाती है और आयोग तुरंत कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि छुआछूत समाज के लिए एक अभिशाप है और इसे रोकने के लिए देश में सख्त कानून बनाए गए हैं। यदि कहीं इन कानूनों का पालन नहीं होता है तो आयोग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करता है।उन्होंने कहा कि रोहड़ू में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या के मामले में आयोग स्वयं मौके पर गया था। जांच में जातिगत भेदभाव सामने आने के बाद जांच में लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन एसएचओ को निलंबित किया गया। इसी तरह सैंज में अनुसूचित जाति समुदाय की एक महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में भी आयोग ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए थे। पुलिस ने पहले इसे आत्महत्या का मामला माना था, लेकिन आयोग के हस्तक्षेप और दोबारा जांच के निर्देशों के बाद जांच दल के अधिकारियों को लापरवाही के चलते निलंबित किया गया और अब मामले की जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सभी सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने जिला प्रशासन को जिले के सभी अंबेडकर भवनों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर आयोग को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।बैठक के दौरान चियोग स्कूल में दलित छात्रा के हाथों से बना मिड-डे मील न खाने के कथित मामले को भी प्रमुखता से उठाया गया। आयोग ने इस मामले को गंभीर बताते हुए शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का निर्णय लिया। आयोग ने कहा कि यदि जांच में भेदभाव की पुष्टि होती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।आयोग के सदस्य डॉ. विजय डोगरा ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सरकार द्वारा आवंटित बजट का सही उपयोग हो रहा है या नहीं, इसकी भी नियमित समीक्षा की जाती है। आयोग को विभिन्न संगठनों और लोगों से जो शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त होते हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाता है।इस अवसर पर आयोग द्वारा “भीम पत्र” का भी विमोचन किया गया। इस पुस्तिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 46, 330, 332 और 338 सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग को दिए गए संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण व्यवस्था, शिक्षा, सरकारी नौकरियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की सरल भाषा में जानकारी दी गई है। आयोग ने बताया कि भविष्य में एक और विशेष पुस्तिका जारी की जाएगी, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव और मांगें रखीं। पूर्व मेयर सोहन लाल ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ता है और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। दलित शोषण मुक्ति मंच के जगत राम ने तेलंगाना की तर्ज पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति घटक योजना के लिए अलग कानून बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इस वर्ग के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग केवल उनके विकास कार्यों पर ही होना चाहिए।रोशन लाल डोगरा ने संविधान के अनुच्छेद-15 को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया, जबकि गोपाल झीलटा ने अनुसूचित जाति वर्ग के पीड़ित लोगों को सरकारी स्तर पर पर्याप्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। बिट्टू पन्ना ने नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की काटी गई सैलरी जारी करने की मांग उठाई। राजेश ने कई स्कूलों में मिड-डे मील वर्करों से सफाई का कार्य करवाने को गलत बताते हुए चियोग स्कूल की घटना को भी प्रमुखता से उठाया।जिला परिषद सदस्य अनुराधा ने संविधान दिवस कार्यक्रमों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वहीं आशा कार्यकर्ताओं और अन्य प्रतिनिधियों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत भेदभाव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम के दौरान आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान को अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी ने हिमाचली टोपी और मफलर पहनाकर सम्मानित किया। आयोग के सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा, डॉ. विजय डोगरा और शालिनी जम्वाल को भी जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया।बैठक में पूर्व मेयर सोहन लाल, जिला परिषद सदस्य अनुराधा, बीडीसी सदस्य आशा कश्यप, रवि कुमार दलित, कर्म चंद भाटिया, एल.आर. कश्यप, रोशन लाल डोगरा, जगत राम, राजेश कश्यप, एस.आर. कश्यप, आर.पी. सिंह, प्रीत पाल मट्टू, यशपाल, अलीशा, अमित भाटिया, नरेश सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

