
धर्मशाला, 2 अगस्त
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की धारकण्डी स्थित बोह घाटी में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत, पुनर्वास और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार इस कठिन समय में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, उन्हें नए मकान के निर्माण के लिए 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा घरेलू सामान, कपड़े, बर्तन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी, ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
उन्होंने आपदा से प्रभावित किसानों और बागवानों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिनकी कृषि एवं बागवानी योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सरकार की ओर से राहत प्रदान की जाएगी। साथ ही जिन परिवारों के घरों में पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें भी राहत के दायरे में शामिल किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को सहायता मिल सकेगी।
धारकण्डी क्षेत्र की बोह घाटी प्रदेश में ट्राउट उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में से एक मानी जाती है। आपदा के कारण कई ट्राउट फार्मों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रभावित मत्स्य पालकों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ट्राउट फार्मों को दोबारा स्थापित करने में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका फिर से पटरी पर लौट सके और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए भी मुख्यमंत्री ने विशेष राहत का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आपदा में जिन परिवारों की गाय या भैंस की मृत्यु हुई है, उन्हें प्रति पशु 55 हजार रुपये तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें प्रति बकरी 15 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री का मानवीय और संवेदनशील व्यवहार पूरे दौरे के दौरान देखने को मिला। उन्होंने प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर उनकी पीड़ा सुनी, बुजुर्गों का हालचाल जाना, महिलाओं को ढांढस बंधाया तथा बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की। एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर उसका हाल पूछने का दृश्य भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के इस व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि सरकार केवल घोषणाएं ही नहीं कर रही, बल्कि संकट की घड़ी में स्वयं लोगों के बीच पहुंचकर उनका मनोबल भी बढ़ा रही है।
राहत और पुनर्वास के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने दरीणी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को स्तरोन्नत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा देने की घोषणा की। इससे धारकण्डी, बोह घाटी और आसपास के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा लंबे समय से चली आ रही स्थानीय मांग भी पूरी होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराई जाए और क्षतिग्रस्त सड़कों, पेयजल योजनाओं तथा अन्य आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं की बहाली का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों के जीवन में भारी कठिनाइयां लेकर आती हैं, लेकिन प्रदेश सरकार हर प्रभावित परिवार के पुनर्वास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राहत प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन को दोबारा व्यवस्थित करना और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार करना भी है।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को स्थानीय लोगों ने राहत, पुनर्वास और विकास के प्रति सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। राहत पैकेज, पुनर्वास योजनाओं और विकास संबंधी घोषणाओं से बोह घाटी के आपदा प्रभावित परिवारों में नई उम्मीद जगी है और लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है कि विपरीत परिस्थितियों में प्रदेश सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
