आपकी आवाज न्यूज कुल्लू जीत कपूर। हिमाचल प्रदेश के विश्वविख्यात अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं के स्वागत और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और दशहरा उत्सव समिति उत्सव के सफल आयोजन के लिए जुटे हुए हैं।कुल्लू दशहरा अपनी अनूठी देव संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। देश के अन्य हिस्सों में विजयादशमी पर दशहरा संपन्न होता है, जबकि कुल्लू में इसी दिन से उत्सव की शुरुआत होती है। भगवान रघुनाथ जी की पारंपरिक रथयात्रा के साथ शुरू होने वाले इस आयोजन में घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों देवी-देवता अपने देवलुओं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ ढालपुर पहुंचते हैं। ढोल-नगाड़ों और करनाल की गूंज के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो जाता है।उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने, यातायात नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेला क्षेत्र में निगरानी, पुलिस व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, अस्थायी शौचालय और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित प्रबंध किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।सांस्कृतिक संध्याएं भी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र में लोक संस्कृति और संगीत की प्रस्तुतियों के साथ कुल्लवी शॉल, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक खान-पान के स्टॉल स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित करेंगे। इससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से उत्सव के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, यातायात नियमों का पालन करने तथा देव संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने की अपील की है। आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा एक बार फिर हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए तैयार है।
